थराली विधानसभा: नंदानगर टाइल्स विवाद के पीछे 2027 चुनाव का ‘शह-मात’ का खेल! भाजपा की गुटबाजी में छिपा है ‘टिकट’ का गणित

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थराली विधानसभा: नंदानगर टाइल्स विवाद के पीछे 2027 चुनाव का ‘शह-मात’ का खेल! भाजपा की गुटबाजी में छिपा है ‘टिकट’ का गणित।

  • एक ओर विधायक खेमा विकास के बहाने 2027 के लिए मजबूत कर रहा जमीन, दूसरी ओर विरोधी धड़े ने ‘भ्रष्टाचार’ को हथियार बना फंसाया सियासी पेंच।
  • नंदानगर बाजार का ₹94.78 लाख का बजट बना अंदरूनी घमासान का केंद्र, सीधे जिलाधिकारी चमोली तक पहुंची जंग।

नंदानगर (चमोली)। जनपद चमोली के विकासखंड नंदानगर मुख्य बाजार में चल रहा ₹94.78 लाख की लागत का इंटरलॉकिंग टाइल्स निर्माण कार्य अब महज एक विकास योजना नहीं रह गया है। आगामी 2027 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही सत्ताधारी दल भाजपा के भीतर की तीखी गुटबाजी, आपसी वर्चस्व और टिकट की दावेदारी की जंग खुलकर सड़क पर आ गई है। नंदानगर बाजार की सड़कों पर बिछ रही टाइल्स अब पार्टी के भीतर एक-दूसरे को ‘शह-मात’ देने की बिसात बन चुकी है।

2027 की तैयारी: विधायक खेमे की ‘क्रेडिट’ पॉलिटिक्स

​सियासी गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि थराली विधानसभा के माननीय विधायक भूपाल राम टम्टा के विशेष प्रयासों से स्वीकृत इस ₹94.78 लाख के बजट को विधायक खेमा 2027 के चुनाव प्रचार के मुख्य एजेंडे के रूप में देख रहा है। बजट पास होते ही विधायक समर्थकों और भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य (26-भेंटी वार्ड) महेन्द्र नेगी द्वारा सोशल मीडिया और धरातल पर बधाई व आभार के पोस्टर चमकाकर जमकर वाहवाही लूटी गई। इस ‘क्रेडिट वॉर’ का सीधा मकसद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र की जनता के बीच विधायक की विकासपरक छवि को स्थापित करना और अपनी दावेदारी को सबसे मजबूत दिखाना माना जा रहा है।

टिकट की रेस या सुशासन की जंग? ब्लॉक मुख्यालय का तीखा वार

​विधायक गुट की इस एकतरफा वाहवाही को भांपते हुए भाजपा के सांगठनिक और स्थानीय स्तर पर बेहद प्रभावशाली दूसरे धड़े ने ब्लॉक मुख्यालय से जवाबी मोर्चा खोल दिया। प्रमुख क्षेत्र पंचायत (ब्लॉक प्रमुख) श्रीमती हीमा नेगी, भाजपा के जिला मीडिया संयोजक हरीश सिंह रावत और प्रान्तीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष नंदन सिंह रावत की अगुवाई वाले इस गुट ने काम शुरू होते ही इसकी कमियों को उजागर कर दिया।

​इस गुट द्वारा सीधे जिलाधिकारी चमोली और लोनिवि (PWD) कर्णप्रयाग के अधिशासी अभियंता को भेजी गई तीखी शिकायत को राजनीतिक पंडित महज “काम का विरोध” नहीं मान रहे हैं। अंदरखाने चर्चा है कि 2027 के चुनाव में थराली सीट से भाजपा के भीतर नए समीकरण बन रहे हैं, और विरोधी खेमा इस घटिया निर्माण कार्य को मुद्दा बनाकर सीधे विधायक की विकासपरक छवि और उनकी ‘जवाबदेही’ पर चोट कर रहा है।

काम की आड़ में राजनीतिक जमीन खिसकाने की रणनीति!

​शिकायतकर्ता नेताओं ने काम में कई गंभीर खामियां गिनाई हैं—जैसे घटिया टाइल्स का प्रयोग, बिना मजबूत बेस (आधार) के निर्माण, जल निकासी का स्लोप न होना और मौके पर लोनिवि के तकनीकी अधिकारियों का न रहना।

​लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विरोध जितना जनता के पैसों की बर्बादी के खिलाफ है, उतना ही आगामी चुनाव में विरोधी खेमे को बैकफुट पर धकेलने के लिए भी है। विरोधी धड़े का तर्क साफ है—”जब प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जीरो टॉलरेंस’ की सरकार है, तो भ्रष्ट ठेकेदार और लापरवाह अधिकारी इस तरह का घटिया काम करके पार्टी और सरकार की छवि क्यों धूमिल कर रहे हैं?” इस नैरेटिव के जरिए वे खुद को सुशासन के रक्षक और विधायक समर्थकों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश में हैं।

जनता के बीच सस्पेंस, आलाकमान की बढ़ी चिंता

​2027 के चुनावी मुहाने पर खड़े नंदानगर में भाजपा के इन दो गुटों की आपसी सिरफुटव्वल ने संगठन के बड़े नेताओं की भी नींद उड़ा दी है। जहां एक खेमा विकास की बधाई स्वीकार कर रहा है, वहीं दूसरा खेमा उसी विकास कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि इस शिकायत पर जिलाधिकारी चमोली की जांच क्या रंग लाती है, और आगामी 2027 के टिकट वितरण से पहले शुरू हुई वर्चस्व की यह जंग ऊंट किस करवट बैठती है।

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